सूरह अश-शूरा (परामर्श — الشورى) (आयत 39)

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42 अश-शूरा(الشورى), आयत ३९

وَالَّذِينَ إِذَا أَصَابَهُمُ الْبَغْيُ هُمْ يَنْتَصِرُونَ 39 ٣٩

और जो ऐसे है कि जब उनपर ज़्यादती होती है तो वे प्रतिशोध करते है (३९)

तफ़सीर
और वे लोग कि जब उनपर अत्याचार होता है, तो आत्म-सम्मान और गौरव की रक्षा के लिए बदला लेते हैं, यदि अत्याचार करने वाला व्यक्ति क्षमा के योग्य नहीं है। और यह बदला लेना उचित है, खासकर अगर क्षमा करने में कोई हित नहीं है।

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