सूरह अज़-ज़ुखरुफ़ (सजावट — الزخرف) (आयत 40)

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43 अज़-ज़ुखरुफ़(الزخرف), आयत ४०

أَفَأَنْتَ تُسْمِعُ الصُّمَّ أَوْ تَهْدِي الْعُمْيَ وَمَنْ كَانَ فِي ضَلَالٍ مُبِينٍ 40 ٤٠

क्या तुम बहरों को सुनाओगे या अंधो को और जो खुली गुमराही में पड़ा हुआ हो उसको राह दिखाओगे? (४०)

तफ़सीर
ये लोग सत्य सुनने से बहरे और उसे देखने से अंधे हैं। तो क्या (ऐ रसूल!) आप बहरे को सुना सकते हैं, अथवा अंधे को रास्ता दिखा सकते हैं, अथवा उन्हें राह पर ला सकते हैं, जो सीधे मार्ग से खुले तौर पर भटके हुए हैं?!

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