सूरह अज़-ज़ुखरुफ़ (सजावट — الزخرف) (आयत 48)

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43 अज़-ज़ुखरुफ़(الزخرف), आयत ४८

وَمَا نُرِيهِمْ مِنْ آيَةٍ إِلَّا هِيَ أَكْبَرُ مِنْ أُخْتِهَا ۖ وَأَخَذْنَاهُمْ بِالْعَذَابِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ 48 ٤٨

और हम उन्हें जो निशानी भी दिखाते वह अपने प्रकार की पहली निशानी से बढ़-चढ़कर होती और हमने उन्हें यातना से ग्रस्त कर लिया, ताकि वे रुजू करें (४८)

तफ़सीर
और हम फ़िरऔन तथा उसकी जाति के प्रमुखों को, मूसा अलैहिस्सलाम के लाए हुए धर्म के सही होने की जो भी निशानी दिखाते, वह उससे पहले की निशानी से बढ़कर होती थी। और हमने उन्हें दुनिया में यातना से ग्रस्त किया, ताकि वे अपने कुफ़्र से बाज़ आ जाएँ। लेकिन इसका कोई फ़ायदा न हुआ।

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