सूरह अद-दुखान (धुआँ — الدخان) (आयत 29)

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44 अद-दुखान(الدخان), आयत २९

فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ وَمَا كَانُوا مُنْظَرِينَ 29 ٢٩

फिर न तो आकाश और धरती ने उनपर विलाप किया और न उन्हें मुहलत ही मिली (२९)

तफ़सीर
जब फ़िरऔन तथा उसकी जाति के लोग डूब गए, तो उनपर न तो आकाश और धरती ने विलाप किया और न उन्हें तौबा करने की मोहलत दी गई।

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