सूरह अल-माइदा (परोसा गया भोजन — المائدة) (आयत 113)

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5 अल-माइदा(المائدة), आयत ११३

قَالُوا نُرِيدُ أَنْ نَأْكُلَ مِنْهَا وَتَطْمَئِنَّ قُلُوبُنَا وَنَعْلَمَ أَنْ قَدْ صَدَقْتَنَا وَنَكُونَ عَلَيْهَا مِنَ الشَّاهِدِينَ 113 ١١٣

वे बोले, "हम चाहते हैं कि उनमें से खाएँ और हमारे हृदय सन्तुष्ट हो और हमें मालूम हो जाए कि तूने हमने सच कहा और हम उसपर गवाह रहें।" (११३)

तफ़सीर
हवारियों ने ईसा से कहा : हम चाहते हैं कि इस दस्तर-ख़्वान से खाएँ, और हमारे दिल अल्लाह की शक्ति की पूर्णता से और इस बात से आश्वस्त हो जाएँ कि आप उसके रसूल हैं, तथा हम निश्चित रूप से जान लें कि आप अल्लाह के पास से जो कुछ लेकर आए हैं, उसमें आपने हमसे सच्च कहा है, और हम उन लोगों के लिए इस बात के साक्षी बन जाएँ, जो यहाँ मौजूद नहीं हैं।

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