सूरह अल-माइदा (परोसा गया भोजन — المائدة) (आयत 33)

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5 अल-माइदा(المائدة), आयत ३३

إِنَّمَا جَزَاءُ الَّذِينَ يُحَارِبُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَيَسْعَوْنَ فِي الْأَرْضِ فَسَادًا أَنْ يُقَتَّلُوا أَوْ يُصَلَّبُوا أَوْ تُقَطَّعَ أَيْدِيهِمْ وَأَرْجُلُهُمْ مِنْ خِلَافٍ أَوْ يُنْفَوْا مِنَ الْأَرْضِ ۚ ذَٰلِكَ لَهُمْ خِزْيٌ فِي الدُّنْيَا ۖ وَلَهُمْ فِي الْآخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيمٌ 33 ٣٣

जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते है और धरती के लिए बिगाड़ पैदा करने के लिए दौड़-धूप करते है, उनका बदला तो बस यही है कि बुरी तरह से क़त्ल किए जाए या सूली पर चढ़ाए जाएँ या उनके हाथ-पाँव विपरीत दिशाओं में काट डाले जाएँ या उन्हें देश से निष्कासित कर दिया जाए। यह अपमान और तिरस्कार उनके लिए दुनिया में है और आख़िरत में उनके लिए बड़ी यातना है (३३)

तफ़सीर
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से युद्ध करते हैं, और उनसे खुली दुश्मनी करते हुए हत्या, लूटमार और डकैती के द्वारा धरती में उत्पात मचाते हैं, उनकी सज़ा यही है कि उन्हें सूली पर चढ़ाए बिना क़त्ल कर दिया जाए, या उन्हें सूली पर चढ़ाकर क़त्ल कर दिया जाए, या उनका दायाँ हाथ और बायाँ पैर काट दिया जाए, यदि वह फिर से ऐसी हरकत करे, तो उसका बायाँ हाथ और दायाँ पैर काट दिया जाए, या उन्हें देश से निकाल दिया जाए। यह सज़ा उनके लिए इस दुनिया में एक अपमान है, तथा आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ी यातना है।

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