सूरह अल-माइदा (परोसा गया भोजन — المائدة) (आयत 53)

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5 अल-माइदा(المائدة), आयत ५३

وَيَقُولُ الَّذِينَ آمَنُوا أَهَٰؤُلَاءِ الَّذِينَ أَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ ۙ إِنَّهُمْ لَمَعَكُمْ ۚ حَبِطَتْ أَعْمَالُهُمْ فَأَصْبَحُوا خَاسِرِينَ 53 ٥٣

उस समय ईमानवाले कहेंगे, "क्या ये वही लोग है जो अल्लाह की कड़ी-कड़ी क़समें खाकर विश्वास दिलाते थे कि हम तुम्हारे साथ है?" इनका किया-धरा सब अकारथ गया और ये घाटे में पड़कर रहे (५३)

तफ़सीर
ईमान वाले, इन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) की स्थिति से चकित होकर कहते हैं : क्या यही लोग हैं जिन्होंने अपनी क़समों की पुष्टि करते हुए यह क़सम खाई थी : निःसंदेह वे ईमान, समर्थन और निष्ठा (वफ़ादारी) में (ऐ ईमान वालो!) तुम्हारे साथ हैं?! उनके कार्य व्यर्थ हो गए। अतः वे अपने उद्देश्य को खो देने और उनके लिए तैयार किए जाने वाले अज़ाब के कारण घाटा उठाने वाले हो गए।

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