कह दो, "क्या तुम अल्लाह से हटकर उसकी बन्दगी करते हो जो न तुम्हारी हानि का अधिकारी है, न लाभ का? हालाँकि सुननेवाला, जाननेवाला अल्लाह ही है।" (७६)
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) आप उनके अल्लाह के अलावा की इबादत करने में उनके विरुद्ध तर्क देते हुए कह दें : क्या तुम ऐसी चीज़ की इबादत करते हो, जो न तुम्हें कोई लाभ पहुँचा सकती है और न तुमसे कोई नुक़सान दूर कर सकती है?! अतः वह अक्षम और विवश है, और अल्लाह विवशता से पाक है। तथा केवल अल्लाह ही तुम्हारी सभी बातों को सुनने वाला है, इसलिए उनमें से कोई भी चीज़ उससे नहीं छूटती है, तुम्हारे सभी कर्मों को जानने वाला है, इसलिए उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। तथा वह तुम्हें उनका बदला देगा।
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