सूरह क़ाफ़ (ق) (आयत 2)

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50 क़ाफ़(ق), आयत २

بَلْ عَجِبُوا أَنْ جَاءَهُمْ مُنْذِرٌ مِنْهُمْ فَقَالَ الْكَافِرُونَ هَٰذَا شَيْءٌ عَجِيبٌ 2 ٢

बल्कि उन्हें तो इस बात पर आश्चर्य हुआ कि उनके पास उन्हीं में से एक सावधान करनेवाला आ गया। फिर इनकार करनेवाले कहने लगे, "यह तो आश्चर्य की बात है (२)

तफ़सीर
उनके इनकार करने का कारण यह नहीं था कि वे आपसे झूठ बोलने की उम्मीद करते थे, क्योंकि वे आपकी सच्चाई जानते थे। बल्कि, उन्हें आश्चर्य हुआ कि उनके पास, फ़रिश्तों में से न होकर, उन्हीं में से एक डराने वाला रसूल आया। उन्होंने आश्चर्य चकित होकर कहा : एक मानव रसूल का हमारे पास आना बड़ी विचित्र बात है!

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