सूरह क़ाफ़ (ق) (आयत 34)

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50 क़ाफ़(ق), आयत ३४

ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ ۖ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْخُلُودِ 34 ٣٤

"प्रवेश करो उस (जन्नत) में सलामती के साथ" वह शाश्वत दिवस है (३४)

तफ़सीर
उनसे कहा जाएगा : जिस चीज़ को तुम नापसंद करते हो, उससे सुरक्षा और सलामती के साथ जन्नत में प्रवेश कर जाओ। यही हमेशा रहने का दिन है, जिसके बाद कोई विनाश नहीं है।

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