सूरह क़ाफ़ (ق) (आयत 37)

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50 क़ाफ़(ق), आयत ३७

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكْرَىٰ لِمَنْ كَانَ لَهُ قَلْبٌ أَوْ أَلْقَى السَّمْعَ وَهُوَ شَهِيدٌ 37 ٣٧

निश्चय ही इसमें उस व्यक्ति के लिए शिक्षा-सामग्री है जिसके पास दिल हो या वह (दिल से) हाजिर रहकर कान लगाए (३७)

तफ़सीर
पिछले समुदायों के विनाश का जो यह उल्लेख किया गया है, निश्चय ही इसमें उस व्यक्ति के लिए याद-दहानी और उपदेश है, जिसके पास समझने वाला दिल हो, या वह उसपर अपना कान लगाए इस हाल में कि उसका दिल उपस्थित हो, असावधान न हो।

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