और उनके मालों में माँगनेवाले और धनहीन का हक़ था (१९)
तफ़सीर
तथा उनके धन में माँगने वाले के लिए तथा उसके लिए जो उनसे नहीं माँगता, जो किसी भी कारण से जीविका से वंचित है, एक हक़ (भाग) था, जिसे वे स्वेच्छा से देते थे।
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