सूरह अज़-ज़ारियात (हवा चलाने वाले — الذاريات) (आयत 53)

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51 अज़-ज़ारियात(الذاريات), आयत ५३

أَتَوَاصَوْا بِهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ 53 ٥٣

क्या उन्होंने एक-दूसरे को इसकी वसीयत कर रखी है? नहीं, बल्कि वे है ही सरकश लोग (५३)

तफ़सीर
क्या पहले के काफिरों और उनमें से बाद के लोगों ने रसूलों को झुठलाने की एक-दूसरे को वसीयत कर रखी है?! नहीं, बल्कि उनकी सरकशी ने उन्हें इसपर एकमत किया है।

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