सूरह अत-तूर (तूर पर्वत — الطور) (आयत 34)

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52 अत-तूर(الطور), आयत ३४

فَلْيَأْتُوا بِحَدِيثٍ مِثْلِهِ إِنْ كَانُوا صَادِقِينَ 34 ٣٤

अच्छा यदि वे सच्चे है तो उन्हें उस जैसी वाणी ले आनी चाहिए (३४)

तफ़सीर
तो वे इस क़ुरआन जैसी एक बात ही ले आएँ, भले ही वह गढ़ी गई हो, यदि वे अपने इस दावे में सच्चे हैं कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसे अपनी ओर से गढ़ लिया है।

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