सूरह अन-नज्म (तारा — النجم) (आयत 17)

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53 अन-नज्म(النجم), आयत १७

مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ 17 ١٧

निगाह न तो टेढ़ी हुइ और न हद से आगे बढ़ी (१७)

तफ़सीर
मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की निगाह दाएँ-बाएँ नहीं गई और न उस सीमा से आगे बढ़ी, जो उनके लिए निर्धारित की गई थी।

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