सूरह अल-क़मर (चाँद — القمر) (आयत 26)

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54 अल-क़मर(القمر), आयत २६

سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَنِ الْكَذَّابُ الْأَشِرُ 26 ٢٦

"कल को ही वे जान लेंगे कि कौन परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है। (२६)

तफ़सीर
वे क़ियामत के दिन जान लेंगे कि बहुत झूठा और अहंकारी कौन है, सालेह अलैहिस्सलाम या खुद वे?

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