सूरह अल-क़मर (चाँद — القمر) (आयत 38)

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54 अल-क़मर(القمر), आयत ३८

وَلَقَدْ صَبَّحَهُمْ بُكْرَةً عَذَابٌ مُسْتَقِرٌّ 38 ٣٨

सुबह सवेरे ही एक अटल यातना उनपर आ पहुँची, (३८)

तफ़सीर
निश्चय सुबह के समय उनपर ऐसी यातना आई, जो उनके साथ निरंतर लगी रहेगी, यहाँ तक कि वे आख़िरत में पहुँच जाएँ और उनपर उसकी यातना आ जाए।

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