या वे कहते है, "और हम मुक़ाबले की शक्ति रखनेवाले एक जत्था है?" (४४)
तफ़सीर
बल्कि, क्या मक्का के ये काफ़िर कहते हैं कि हम एक ऐसा जत्था हैं, जो उससे बदले लेकर रहने वाले हैं, जो हमारा बुरा चाहता है और हमारे जत्थे को तितर-बितर करना चाहता है?!
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