सूरह अल-क़मर (चाँद — القمر) (आयत 47)

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54 अल-क़मर(القمر), आयत ४७

إِنَّ الْمُجْرِمِينَ فِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ 47 ٤٧

निस्संदेह, अपराधी लोग गुमराही और दीवानेपन में पड़े हुए है (४७)

तफ़सीर
निश्चय कुफ़्र और पाप करने वाले अपराधी सत्य से भटके हुए, तथा यातना और कष्ट में हैं।

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