सूरह अल-क़मर (चाँद — القمر) (आयत 50)

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54 अल-क़मर(القمر), आयत ५०

وَمَا أَمْرُنَا إِلَّا وَاحِدَةٌ كَلَمْحٍ بِالْبَصَرِ 50 ٥٠

और हमारा आदेश (और काम) तो बस एक दम की बात होती है जैसे आँख का झपकना (५०)

तफ़सीर
जब हम किसी चीज़ का इरादा करते हैं, तो हमारा आदेश केवल एक शब्द कहना होता है, कि : "हो जा", तो जो हम चाहते हैं वह पलक झपकते ही तेज़ी से हो जाती है।

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