सूरह अर-रहमान (दयालु) سُورَة الرحمن

सूरह अर-रहमान क़ुरआन की पचपचासीवीं सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 78 आयतें हैं और इसमें अल्लाह की कृपा, उसकी दया और उसके आशीर्वाद के बारे में चर्चा की गई है।

सूरह अर-रहमान (परम दयालु) — سُورَةُ الرحمن

जिसे यह भी कहा जाता है: ʿArūs al-Qurʾān (क़ुरआन की दुल्हन)

فِيهَا فَاكِهَةٌ وَالنَّخْلُ ذَاتُ الْأَكْمَامِ ١١ i

55:११

उसमें स्वादिष्ट फल है और खजूर के वृक्ष है, जिनके फल आवरणों में लिपटे हुए है, (११)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ١٣ i

55:१३

तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (१३)

خَلَقَ الْإِنْسَانَ مِنْ صَلْصَالٍ كَالْفَخَّارِ ١٤ i

55:१४

उसने मनुष्य को ठीकरी जैसी खनखनाती हुए मिट्टी से पैदा किया; (१४)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ١٦ i

55:१६

फिर तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे? (१६)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٢٣ i

55:२३

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे? (२३)

وَلَهُ الْجَوَارِ الْمُنْشَآتُ فِي الْبَحْرِ كَالْأَعْلَامِ ٢٤ i

55:२४

उसी के बस में है समुद्र में पहाड़ो की तरह उठे हुए जहाज़ (२४)

وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ ٢٧ i

55:२७

किन्तु तुम्हारे रब का प्रतापवान और उदार स्वरूप शेष रहनेवाला है (२७)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٢٨ i

55:२८

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगं? (२८)

يَسْأَلُهُ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِي شَأْنٍ ٢٩ i

55:२९

आकाशों और धरती में जो भी है उसी से माँगता है। उसकी नित्य नई शान है (२९)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٠ i

55:३०

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (३०)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٢ i

55:३२

तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (३२)

يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنْسِ إِنِ اسْتَطَعْتُمْ أَنْ تَنْفُذُوا مِنْ أَقْطَارِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ فَانْفُذُوا ۚ لَا تَنْفُذُونَ إِلَّا بِسُلْطَانٍ ٣٣ i

55:३३

ऐ जिन्नों और मनुष्यों के गिरोह! यदि तुममें हो सके कि आकाशों और धरती की सीमाओं को पार कर सको, तो पार कर जाओ; तुम कदापि पार नहीं कर सकते बिना अधिकार-शक्ति के (३३)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٤ i

55:३४

अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे? (३४)

يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌ مِنْ نَارٍ وَنُحَاسٌ فَلَا تَنْتَصِرَانِ ٣٥ i

55:३५

अतः तुम दोनों पर अग्नि-ज्वाला और धुएँवाला अंगारा (पिघला ताँबा) छोड़ दिया जाएगा, फिर तुम मुक़ाबला न कर सकोगे। (३५)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٦ i

55:३६

अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे? (३६)

فَإِذَا انْشَقَّتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ وَرْدَةً كَالدِّهَانِ ٣٧ i

55:३७

फिर जब आकाश फट जाएगा और लाल चमड़े की तरह लाल हो जाएगा। (३७)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٨ i

55:३८

- अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे? (३८)

فَيَوْمَئِذٍ لَا يُسْأَلُ عَنْ ذَنْبِهِ إِنْسٌ وَلَا جَانٌّ ٣٩ i

55:३९

फिर उस दिन न किसी मनुष्य से उसके गुनाह के विषय में पूछा जाएगा न किसी जिन्न से (३९)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٠ i

55:४०

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे? (४०)

يُعْرَفُ الْمُجْرِمُونَ بِسِيمَاهُمْ فَيُؤْخَذُ بِالنَّوَاصِي وَالْأَقْدَامِ ٤١ i

55:४१

अपराधी अपने चहरों से पहचान लिए जाएँगे और उनके माथे के बालों और टाँगों द्वारा पकड़ लिया जाएगा (४१)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٢ i

55:४२

अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे? (४२)

هَٰذِهِ جَهَنَّمُ الَّتِي يُكَذِّبُ بِهَا الْمُجْرِمُونَ ٤٣ i

55:४३

यही वह जहन्नम है जिसे अपराधी लोग झूठ ठहराते रहे है (४३)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٥ i

55:४५

फिर तुम दोनों अपने रब के सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे? (४५)

وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ جَنَّتَانِ ٤٦ i

55:४६

किन्तु जो अपने रब के सामने खड़े होने का डर रखता होगा, उसके लिए दो बाग़ है। - (४६)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٧ i

55:४७

तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (४७)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥١ i

55:५१

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (५१)

مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ فُرُشٍ بَطَائِنُهَا مِنْ إِسْتَبْرَقٍ ۚ وَجَنَى الْجَنَّتَيْنِ دَانٍ ٥٤ i

55:५४

वे ऐसे बिछौनो पर तकिया लगाए हुए होंगे जिनके अस्तर गाढे रेशम के होंगे, और दोनों बाग़ो के फल झुके हुए निकट ही होंगे। (५४)

فِيهِنَّ قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنْسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَانٌّ ٥٦ i

55:५६

उन (अनुकम्पाओं) में निगाह बचाए रखनेवाली (सुन्दर) स्त्रियाँ होंगी, जिन्हें उनसे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया और न किसी जिन्न ने (५६)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥٧ i

55:५७

फिर तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (५७)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥٩ i

55:५९

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (५९)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦١ i

55:६१

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (६१)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٣ i

55:६३

फिर तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (६३)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٥ i

55:६५

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (६५)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٧ i

55:६७

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे? (६७)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٩ i

55:६९

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (६९)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧١ i

55:७१

तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (७१)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧٣ i

55:७३

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे? (७३)

لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنْسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَانٌّ ٧٤ i

55:७४

जिन्हें उससे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया होगा और न किसी जिन्न ने। (७४)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧٥ i

55:७५

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (७५)

مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ رَفْرَفٍ خُضْرٍ وَعَبْقَرِيٍّ حِسَانٍ ٧٦ i

55:७६

वे हरे रेशमी गद्दो और उत्कृष्ट् और असाधारण क़ालीनों पर तकिया लगाए होंगे; (७६)

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧٧ i

55:७७

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे? (७७)

تَبَارَكَ اسْمُ رَبِّكَ ذِي الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ ٧٨ i

55:७८

बड़ा ही बरकतवाला नाम है तुम्हारे प्रतापवान और उदार रब का (७८)