सूरह अर-रहमान (परम दयालु — الرحمن) (आयत 27)

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55 अर-रहमान(الرحمن), आयत २७

وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ 27 ٢٧

किन्तु तुम्हारे रब का प्रतापवान और उदार स्वरूप शेष रहनेवाला है (२७)

तफ़सीर
और (ऐ रसूल!) आपके रब का चेहरा, जो महानता और अपने बंदों पर उपकार और कृतज्ञता वाला है, बाक़ी रहेगा। उसपर कभी भी विनाश नहीं आएगा।

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