सूरह अर-रहमान (परम दयालु — الرحمن) (आयत 43)
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अर-रहमान(الرحمن), आयत ४३
هَٰذِهِ جَهَنَّمُ الَّتِي يُكَذِّبُ بِهَا الْمُجْرِمُونَ
यही वह जहन्नम है जिसे अपराधी लोग झूठ ठहराते रहे है (४३)
तफ़सीर
और उन्हें फटकारते हुए कहा जाएगा : यह जहन्नम, जिसे अपराधी लोग दुनिया में झुठलाते थे, उनकी आँखों के सामने है और वे इसका इनकार नहीं कर सकते।
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