सूरह अर-रहमान (परम दयालु — الرحمن) (आयत 46)

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55 अर-रहमान(الرحمن), आयत ४६

وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ جَنَّتَانِ 46 ٤٦

किन्तु जो अपने रब के सामने खड़े होने का डर रखता होगा, उसके लिए दो बाग़ है। - (४६)

तफ़सीर
जो व्यक्ति आख़िरत में अपने रब के सामने खड़े होने से डरा, अतः वह ईमान लाया और नेक कार्य किया - उसके लिए दो बाग़ हैं।

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