सूरह अर-रहमान (परम दयालु — الرحمن) (आयत 53)

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55 अर-रहमान(الرحمن), आयत ५३

فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ 53 ٥٣

अतः तुम दोनो रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे? (५३)

तफ़सीर
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?

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