सूरह अर-रहमान (परम दयालु — الرحمن) (आयत 74)

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55 अर-रहमान(الرحمن), आयत ७४

لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنْسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَانٌّ 74 ٧٤

जिन्हें उससे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया होगा और न किसी जिन्न ने। (७४)

तफ़सीर
उनके पतियों से पहले कोई इनसान या जिन्न उनके पास नहीं आया।

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