सूरह अर-रहमान (परम दयालु — الرحمن) (आयत 8)

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55 अर-रहमान(الرحمن), आयत ८

أَلَّا تَطْغَوْا فِي الْمِيزَانِ 8 ٨

कि तुम भी तुला में सीमा का उल्लंघन न करो (८)

तफ़सीर
उसने न्याय को इसलिए स्थापित किया, ताकि (ऐ लोगो!) तुम अन्याय न करो और माप-तौल में धोखाधड़ी से काम न लो।

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