सूरह अल-वाक़िया (घटना — الواقعة) (आयत 25)

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56 अल-वाक़िया(الواقعة), आयत २५

لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا تَأْثِيمًا 25 ٢٥

उसमें वे न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न गुनाह की बात; (२५)

तफ़सीर
वे जन्नत में अश्लील बातें नहीं सुनेंगे, और न ही कोई ऐसी बात जिसके कहने वाले को पाप लगे।

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