सूरह अल-वाक़िया (घटना — الواقعة) (आयत 30)

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56 अल-वाक़िया(الواقعة), आयत ३०

وَظِلٍّ مَمْدُودٍ 30 ٣٠

दूर तक फैली हुई छाँव; (३०)

तफ़सीर
और ऐसी छाया में जो अच्छी तरह फैली हुई, निरंतर रहने वाली है, जो कभी समाप्त न होगी।

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