सूरह अल-वाक़िया (घटना — الواقعة) (आयत 57)

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56 अल-वाक़िया(الواقعة), आयत ५७

نَحْنُ خَلَقْنَاكُمْ فَلَوْلَا تُصَدِّقُونَ 57 ٥٧

हमने तुम्हें पैदा किया; फिर तुम सच क्यों नहीं मानते? (५७)

तफ़सीर
हम ही ने (ऐ झुठलाने वालो!) तुम्हें पैदा किया, जबकि तुम कुछ नहीं थे। फिर तुम क्यों सच नहीं मानते कि हम तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें दोबारा जीवित करके उठाएँगे?!

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