सूरह अल-हश्र (एकत्रीकरण — الحشر) (आयत 18)

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59 अल-हश्र(الحشر), आयत १८

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَلْتَنْظُرْ نَفْسٌ مَا قَدَّمَتْ لِغَدٍ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ 18 ١٨

ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह का डर रखो। और प्रत्येक व्यक्ति को यह देखना चाहिए कि उसने कल के लिए क्या भेजा है। और अल्लाह का डर रखो। जो कुछ भी तुम करते हो निश्चय ही अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है (१८)

तफ़सीर
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करते हुए और उसके निषेधों से बचते हुए, डरते रहो। और हर आदमी यह विचार करे कि उसने क़ियामत के दिन के लिए क्या नेक कार्य आगे भेजा है। तथा अल्लाह से डरो। निश्चय वह तुम्हारे कर्मों से अच्छी तरह अवगत है। उससे तुम्हारा कोई कार्य छिपा नहीं है। और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।

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