सूरह अल-अनआम (पशु — الأنعام) (आयत 39)

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6 अल-अनआम(الأنعام), आयत ३९

وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا صُمٌّ وَبُكْمٌ فِي الظُّلُمَاتِ ۗ مَنْ يَشَإِ اللَّهُ يُضْلِلْهُ وَمَنْ يَشَأْ يَجْعَلْهُ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ 39 ٣٩

जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया, वे बहरे और गूँगे है, अँधेरों में पड़े हुए हैं। अल्लाह जिसे चाहे भटकने दे और जिसे चाहे सीधे मार्ग पर लगा दे (३९)

तफ़सीर
जिन लोगों ने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठलाया, वे उन बहरों के समान हैं जो सुनते नहीं, और गूँगों के समान हैं जो बोलते नहीं, इसके उपरांत वे अँधेरों में पड़े हुए हैं, उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता। तो जिसकी ऐसी दशा है, वह मार्गदर्शन कैसे प्राप्त कर सकता है?! अल्लाह लोगों में से जिसे पथभ्रष्ट करना चाहता है, उसे पथभ्रष्ट कर देता है, और जिसे मार्गदर्शन प्रदान करना चाहता है, उसका मार्गदर्शन करते हुए उसे सीधे मार्ग पर लगा देता है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं होता।

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