सूरह अल-मुम्तहिना (जांचने वाली — الممتحنة) (आयत 11)

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60 अल-मुम्तहिना(الممتحنة), आयत ११

وَإِنْ فَاتَكُمْ شَيْءٌ مِنْ أَزْوَاجِكُمْ إِلَى الْكُفَّارِ فَعَاقَبْتُمْ فَآتُوا الَّذِينَ ذَهَبَتْ أَزْوَاجُهُمْ مِثْلَ مَا أَنْفَقُوا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي أَنْتُمْ بِهِ مُؤْمِنُونَ 11 ١١

और यदि तुम्हारी पत्नि यो (के मह्रों) में से कुछ तुम्हारे हाथ से निकल जाए और इनकार करनेवालों (अधर्मियों) की ओर रह जाए, फिर तुम्हारी नौबत आए, जो जिन लोगों की पत्नियों चली गई है, उन्हें जितना उन्होंने ख़र्च किया हो दे दो। और अल्लाह का डर रखो, जिसपर तुम ईमान रखते हो (११)

तफ़सीर
और अगर ऐसा हो कि तुम्हारी कुछ स्त्रियाँ इस्लाम को त्यागकर काफ़िरों की ओर चली जाएँ, और तुम काफ़िरों से उनका महर माँगो और वे उसे न दें। फिर तुम्हें काफ़िरों से ग़नीमत का धन प्राप्त हो, तो इस्लाम को त्यागकर जाने वाली स्त्रियों के पतियों को उनके खर्च किए हुए महर के बराबर धन दे दो। और अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, डरते रहो, जिसपर तुम ईमान रखते हो।

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