सूरह अल-मुम्तहिना (जांचने वाली — الممتحنة) (आयत 13)

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60 अल-मुम्तहिना(الممتحنة), आयत १३

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَوَلَّوْا قَوْمًا غَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ قَدْ يَئِسُوا مِنَ الْآخِرَةِ كَمَا يَئِسَ الْكُفَّارُ مِنْ أَصْحَابِ الْقُبُورِ 13 ١٣

ऐ ईमान लानेवालो! ऐसे लोगों से मित्रता न करो जिनपर अल्लाह का प्रकोप हुआ, वे आख़िरत से निराश हो चुके है, जिस प्रकार इनकार करनेवाले क़ब्रवालों से निराश हो चुके है (१३)

तफ़सीर
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! ऐसे लोगों से मित्रता न रखो, जिनपर अल्लाह क्रोधित हुआ है, जो क़ियामत के दिन पर विश्वास नहीं रखते, बल्कि वे उससे उसी तरह निराश हैं, जैसे मरणोपरांत पुनर्जीवन के इनकार के कारण अपने मरे हुए लोगों के लौटने से निराश हैं।

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