सूरह अत-तग़ाबुन (एक-दूसरे को धोखा — التغابن) (आयत 17)

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64 अत-तग़ाबुन(التغابن), आयत १७

إِنْ تُقْرِضُوا اللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا يُضَاعِفْهُ لَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۚ وَاللَّهُ شَكُورٌ حَلِيمٌ 17 ١٧

यदि तुम अल्लाह को अच्छा ऋण दो तो वह उसे तुम्हारे लिए कई गुना बढ़ा देगा और तुम्हें क्षमा कर देगा। अल्लाह बड़ा गुणग्राहक और सहनशील है, (१७)

तफ़सीर
अगर तुम अल्लाह को अच्छा ऋण दोगे, इस प्रकार कि उसके रास्ते में अपना धन खर्च करोगे, तो वह एक नेकी को दस से सात सौ गुना, बल्कि बहुत अधिक गुना करके तुम्हारे प्रतिफल को बढ़ा देगा और तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा। अल्लाह बहुत गुणग्राही है, वह थोड़े से काम के लिए बहुत अधिक प्रतिफल देता है। अत्यंत सहनशील है, सज़ा देने में जल्दी नहीं करता।

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