सूरह अल-क़लम (कलम — القلم) (आयत 24)

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68 अल-क़लम(القلم), आयत २४

أَنْ لَا يَدْخُلَنَّهَا الْيَوْمَ عَلَيْكُمْ مِسْكِينٌ 24 ٢٤

कि आज वहाँ कोई मुहताज तुम्हारे पास न पहुँचने पाए (२४)

तफ़सीर
वे आपस में कह रहे थे : आज बाग़ में तुम्हारे पास कोई ग़रीब हरगिज़ न पहुँचने पाए।

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