सूरह अल-क़लम (कलम — القلم) (आयत 29)

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68 अल-क़लम(القلم), आयत २९

قَالُوا سُبْحَانَ رَبِّنَا إِنَّا كُنَّا ظَالِمِينَ 29 ٢٩

वे पुकार उठे, "महान और उच्च है हमारा रब! निश्चय ही हम ज़ालिम थे।" (२९)

तफ़सीर
उन्होंने कहा : हमारा रब पवित्र है। निःसंदेह हम ही अपने ऊपर अत्याचार करने वाले थे जब हमने ग़रीबों को अपने बाग़ के फलों से रोकने का संकल्प किया था।

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