सूरह अल-क़लम (कलम — القلم) (आयत 30)

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68 अल-क़लम(القلم), आयत ३०

فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَلَاوَمُونَ 30 ٣٠

फिर वे परस्पर एक-दूसरे की ओर रुख़ करके लगे एक-दूसरे को मलामत करने। (३०)

तफ़सीर
फिर वे एक-दूसरे के सम्मुख होकर परस्पर एक-दूसरे को दोषी ठहराने लगे।

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