सूरह अल-क़लम (कलम — القلم) (आयत 33)

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68 अल-क़लम(القلم), आयत ३३

كَذَٰلِكَ الْعَذَابُ ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ 33 ٣٣

यातना ऐसी ही होती है, और आख़िरत की यातना तो निश्चय ही इससे भी बड़ी है, काश वे जानते! (३३)

तफ़सीर
आजीविका से वंचित करके इस यातना की तरह हम उन लोगों को यातना देते हैं जो हमारी अवज्ञा करते हैं, और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश वे उसकी गंभीरता और निरंतरता को जानते!

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