सूरह अल-क़लम (कलम — القلم) (आयत 44)

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68 अल-क़लम(القلم), आयत ४४

فَذَرْنِي وَمَنْ يُكَذِّبُ بِهَٰذَا الْحَدِيثِ ۖ سَنَسْتَدْرِجُهُمْ مِنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ 44 ٤٤

अतः तुम मुझे छोड़ दो और उसको जो इस वाणी को झुठलाता है। हम ऐसों को क्रमशः (विनाश की ओर) ले जाएँगे, ऐसे तरीक़े से कि वे नहीं जानते (४४)

तफ़सीर
तो (ऐ रसूल) आप मुझे तथा उसे छोड़ दें, जो आपपर उतरने वाले इस क़ुरआन को झुठलाता है। हम उन्हें धीरे-धीरे इस तरह यातना की ओर लेजाएँगे कि उन्हें पता नहीं चलेगा कि यह उनके साथ चाल चली जा रही है और उन्हें ढील दी जा रही है।

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