सूरह अल-क़लम (कलम — القلم) (आयत 45)

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68 अल-क़लम(القلم), आयत ४५

وَأُمْلِي لَهُمْ ۚ إِنَّ كَيْدِي مَتِينٌ 45 ٤٥

मैं उन्हें ढील दे रहा हूँ। निश्चय ही मेरी चाल बड़ी मज़बूत है (४५)

तफ़सीर
और मैं उन्हें कुछ सयम के लिए मोहलत दे दूँगा, ताकि वे अपने पाप में चरम पर पहुँच जाएँ। निश्चय इनकार करने और झुठलाने वालों के साथ मेरी चाल बहुत मज़बूत है। इसलिए वे मेरी पकड़ से छूट नहीं सकते और मेरी सज़ा से नहीं बच सकते।

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