सूरह अल-अराफ़ (ऊंची दीवारें — الأعراف) (आयत 161)

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7 अल-अराफ़(الأعراف), आयत १६१

وَإِذْ قِيلَ لَهُمُ اسْكُنُوا هَٰذِهِ الْقَرْيَةَ وَكُلُوا مِنْهَا حَيْثُ شِئْتُمْ وَقُولُوا حِطَّةٌ وَادْخُلُوا الْبَابَ سُجَّدًا نَغْفِرْ لَكُمْ خَطِيئَاتِكُمْ ۚ سَنَزِيدُ الْمُحْسِنِينَ 161 ١٦١

याद करो जब उनसे कहा गया, "इस बस्ती में रहो-बसो और इसमें जहाँ से चाहो खाओ और कहो - हित्ततुन। और द्वार में सजदा करते हुए प्रवेश करो। हम तुम्हारी ख़ताओं को क्षमा कर देंगे और हम सुकर्मी लोगों को अधिक भी देंगे।" (१६१)

तफ़सीर
और (ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब अल्लाह ने बनी इसराईल से कहा कि बैतुल मक़्दिस में प्रवेश कर जाओ, और उसकी बस्ती के फलों को किसी भी स्थान से और जिस समय भी तुम चाहो, खाओ और कहो कि : ऐ हमारे पालनहार! हमारे पाप क्षमा कर दे। तथा द्वार में झुकते हुए, अपने पालनहार के लिए विनम्रता अपनाते हुए प्रवेश करो। यदि तुमने ऐसा किया, (तो) हम तुम्हारे गुनाह क्षमा कर देंगे और सत्कर्म करने वालों को दुनिया एवं आख़िरत की भलाइयाँ और अधिक प्रदान करेंगे।

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