सूरह अल-मआरिज (ऊपर चढ़ने के मार्ग — المعارج) (आयत 25)
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अल-मआरिज(المعارج), आयत २५
لِلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ
माँगनेवालों और वंचित का एक ज्ञात और निश्चित हक़ होता है, (२५)
तफ़सीर
वे उसे उस व्यक्ति को देते हैं, जो उनसे माँगता है तथा उस व्यक्ति को देते हैं, जो उनसे नहीं माँगता है, जो किसी कारण से अपनी आजीविका से वंचित है।
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