सूरह अल-मुज़्ज़म्मिल (चादर ओढ़े हुए — المزمل) (आयत 18)

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73 अल-मुज़्ज़म्मिल(المزمل), आयत १८

السَّمَاءُ مُنْفَطِرٌ بِهِ ۚ كَانَ وَعْدُهُ مَفْعُولًا 18 ١٨

आकाश उसके कारण फटा पड़ रहा है, उसका वादा तो पूरा ही होना है (१८)

तफ़सीर
उस दिन की भयावहता से आकाश फट जाएगा। अल्लाह का वादा अनिवार्य रूप से पूरा होकर रहेगा।

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