सूरह अल-मुद्दस्सिर (कंबल ओढ़े हुए — المدثر) (आयत 53)
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अल-मुद्दस्सिर(المدثر), आयत ५३
كَلَّا ۖ بَلْ لَا يَخَافُونَ الْآخِرَةَ
कदापि नहीं, बल्कि ले आख़िरत से डरते नहीं (५३)
तफ़सीर
मामला यह नहीं है। बल्कि उनके गुमराही में में बने रहने का कारण यह है कि वे आख़िरत की यातना पर ईमान नहीं रखते हैं। इसलिए वे अपने कुफ़्र पर बने हुए हैं।
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