सूरह अल-क़ियामा (पुनरुत्थान) سُورَة القيامة

सूरह अल-क़ियामा क़ुरआन की पचहतरवीं सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 40 आयतें हैं और इसमें क़यामत, पुनरुत्थान और उसके दिन की घटनाओं के बारे में चर्चा की गई है।

सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान)) — سُورَةُ القيامة

जिसे यह भी कहा जाता है: Lā Uqsimu (मैं क़सम नहीं खाता), Lā Uqsimu bi-Yawm al-Qiyāmah (मैं क़सम नहीं खाता क़ियामत के दिन की)

أَيَحْسَبُ الْإِنْسَانُ أَلَّنْ نَجْمَعَ عِظَامَهُ ٣ i

75:३

क्या मनुष्य यह समझता है कि हम कदापि उसकी हड्डियों को एकत्र न करेंगे? (३)

بَلَىٰ قَادِرِينَ عَلَىٰ أَنْ نُسَوِّيَ بَنَانَهُ ٤ i

75:४

क्यों नहीं, हम उसकी पोरों को ठीक-ठाक करने की सामर्थ्य रखते है (४)

يُنَبَّأُ الْإِنْسَانُ يَوْمَئِذٍ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ ١٣ i

75:१३

उस दिन मनुष्य को बता दिया जाएगा जो कुछ उसने आगे बढाया और पीछे टाला (१३)

كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ الْعَاجِلَةَ ٢٠ i

75:२०

कुछ नहीं, बल्कि तुम लोग शीघ्र मिलनेवाली चीज़ (दुनिया) से प्रेम रखते हो, (२०)

ثُمَّ كَانَ عَلَقَةً فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ ٣٨ i

75:३८

फिर वह रक्त की एक फुटकी हुआ, फिर अल्लाह ने उसे रूप दिया और उसके अंग-प्रत्यंग ठीक-ठाक किए (३८)

أَلَيْسَ ذَٰلِكَ بِقَادِرٍ عَلَىٰ أَنْ يُحْيِيَ الْمَوْتَىٰ ٤٠ i

75:४०

क्या उसे वह सामर्थ्य प्राप्त- नहीं कि वह मुर्दों को जीवित कर दे? (४०)