सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 11)
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अल-क़ियामह(القيامة), आयत ११
كَلَّا لَا وَزَرَ
कुछ नहीं, कोई शरण-स्थल नहीं! (११)
तफ़सीर
उस दिन भागने का कोई अवसर न होगा और न ही कोई शरण स्थल होगा, जहाँ कुकर्मी शरण ले सके और न कोई बचने का स्थान होगा, जहाँ पहुँचकर बच सके।
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