सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 14)
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अल-क़ियामह(القيامة), आयत १४
بَلِ الْإِنْسَانُ عَلَىٰ نَفْسِهِ بَصِيرَةٌ
नहीं, बल्कि मनुष्य स्वयं अपने हाल पर निगाह रखता है, (१४)
तफ़सीर
बल्कि मनुष्य खुद के खिलाफ़ एक गवाह है, क्योंकि उसके शरीर के अंग उसके खिलाफ़ गवाही देंगे कि उसने क्या पाप किए हैं।
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