सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 15)
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अल-क़ियामह(القيامة), आयत १५
وَلَوْ أَلْقَىٰ مَعَاذِيرَهُ
यद्यपि उसने अपने कितने ही बहाने पेश किए हो (१५)
तफ़सीर
यद्यपि वह तरह-तरह के बहाने पेश करके अपने बारे में यह तर्क दे कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है, लेकिन इसका उसे कुछ लाभ नहीं होगा।
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