सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 16)
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अल-क़ियामह(القيامة), आयत १६
لَا تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ
तू उसे शीघ्र पाने के लिए उसके प्रति अपनी ज़बान को न चला (१६)
तफ़सीर
(ऐ रसूल) क़ुरआन के साथ अपनी ज़ुबान को न हिलाएँ इस बात के लिए जल्दी करते हुए कि कहीं वह आपकी याददाश्त से निकल न जाए।
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